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हेडलाइन: बिहार में VVIP यात्रा के लिए एक और हेलिकॉप्टर किराए पर लेगी सरकार, 1 अप्रैल से सेवा शुरू करने की तैयारी

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पटना: बिहार में अति विशिष्ट और वीवीआईपी श्रेणी के व्यक्तियों की हवाई यात्रा को सुगम और तेज बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक और हेलिकॉप्टर किराए पर लेने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में राज्य के सिविल विमानन विभाग ने कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित करते हुए टेंडर जारी कर दिया है। सरकार की योजना के अनुसार नया हेलिकॉप्टर 1 अप्रैल 2026 से राज्य में सेवा देना शुरू कर देगा और इसका उपयोग मुख्य रूप से वीवीआईपी, अतिविशिष्ट अधिकारियों और महत्वपूर्ण सरकारी यात्राओं के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि राज्य में तेजी से बढ़ती प्रशासनिक गतिविधियों और आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त हेलिकॉप्टर की व्यवस्था आवश्यक हो गई है।
सिविल विमानन विभाग द्वारा जारी शर्तों के अनुसार यह हेलिकॉप्टर मासिक किराए के आधार पर लिया जाएगा और एक महीने में इसकी उड़ान का समय 25 घंटे निर्धारित किया गया है। इसके लिए उन कंपनियों को आवेदन करने का अवसर दिया गया है जिनके पास नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA के अधीन एनएसओपी (Non Scheduled Operator Permit) धारक का लाइसेंस है। सरकार ने साफ किया है कि हेलिकॉप्टर दो इंजन वाला होगा और इसे विशेष रूप से वीवीआईपी तथा आईपी कॉन्फ़िगरेशन के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसकी बैठने की क्षमता 8+2 होगी, जबकि वीआईपी कॉन्फ़िगरेशन में यह 7 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा।
सरकार की ओर से जारी टेंडर दस्तावेज में हेलिकॉप्टर की उपलब्धता और संचालन से संबंधित कई शर्तें भी निर्धारित की गई हैं ताकि सेवा में किसी प्रकार की बाधा न आए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सामान्य परिस्थितियों में एक महीने के दौरान अधिकतम चार दिनों तक हेलिकॉप्टर को रखरखाव या तकनीकी जांच के लिए ग्राउंड करने की अनुमति होगी। हालांकि यदि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से यह अवधि चार दिनों से अधिक हो जाती है तो संबंधित कंपनी को तुरंत वैकल्पिक हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराना होगा।
टेंडर की शर्तों में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि ऑपरेटर कंपनी निर्धारित समय में बैकअप हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराने में विफल रहती है तो उस पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इस स्थिति में कंपनी के मासिक भुगतान से प्रति दिन के हिसाब से कटौती की जाएगी और एक दिन के लिए निर्धारित मासिक शुल्क का पंद्रहवां हिस्सा जुर्माने के रूप में काटा जाएगा। यह राशि मासिक बिल या प्रति घंटे उड़ान शुल्क से समायोजित की जाएगी।
सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य में वीवीआईपी और सरकारी अधिकारियों को अक्सर दूरदराज के जिलों का दौरा करना पड़ता है, ऐसे में अतिरिक्त हेलिकॉप्टर उपलब्ध होने से समय की बचत होगी और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव हो सकेगा। सिविल विमानन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में हवाई सेवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक गतिशीलता दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

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